Shri Ramcharit Manas:रामायण ,सुंदरकांड पाठ से पहले जरूरी है इन मन्त्रों से प्रभु का आह्वान

0
887

उज्जैन // Shri Ramcharit Manasश्री रामचरित मानस एक अति पावन धार्मिक ग्रन्थ है। सभी सनातन धर्मावलम्बियों के घर में यह उपलब्ध होता है। श्री राम चरित मानस में मर्यादा पुरषोत्तम प्रभु श्री राम के धरती पर अवतार व उनकी लीलाओं का महाकवि गोस्वामी तुलसीदास ने बेहद भक्तिपूर्ण भाव से वर्णन किया है।

इस ग्रन्थ का अध्ययन,वाचन व्यक्ति के जीवन में सुख , शांति लाता है।

प्रभु श्री राम सभी सनातन धर्मप्रेमियों के आराध्य हैं। उनके स्मरण मात्र से व्यक्ति का कल्याण होता है। श्रद्धालु भक्तिभाव से रामायण पाठ करते हैं।

किन्हीं घरों में इसका निरंतर तो कुछ विशेष अवसरों पर अखंड रामायण पाठ होता है।

सात कांड में विभक्त है श्री राम चरित मानस

श्रीरामचरित मानस को गोस्वामी जी ने सात काण्डों में विभक्त किया है। इन सात काण्डों के नाम हैं – बालकाण्ड, अयोध्याकाण्ड, अरण्यकाण्ड, किष्किन्धाकाण्ड, सुन्दरकाण्ड, लंकाकाण्ड (युद्धकाण्ड) और उत्तरकाण्ड।

छन्दों की संख्या के अनुसार बालकाण्ड और किष्किन्धाकाण्ड क्रमशः सबसे बड़े और छोटे काण्ड हैं।

श्री राम चरित मानस के पांचवें कांड में पवनसुत हनुमान की राम भक्ति का विशेष वर्णन है। भगवान् श्री राम के अनन्य भक्त श्री हनुमान की आराधना में सुन्दर कांड पाठ का विशेष महत्व है। श्रद्धालु प्रति सप्ताह मंगलवार व शनिवार को इसका वाचन करते हैं।

श्री हनुमान को प्रिय है श्री राम कथा : श्री हनुमान को श्री राम कथा अतिप्रिय है। इसलिए , ग्रंथों में श्री रामचरित मानस या सुंदरकांड पाठ से पहले प्रभु श्री राम के भक्त श्री हनुमान की आराधना ,उनका आह्वान एवं पाठ के समापन पर मन्त्रों के जरिये उनकी विदाई अनिवार्य बताई गई है।

तब ही पाठ सार्थक होता है और इसका फल मिलता है। प्रभु का आह्वान किये बिना पाठ का वाचन निषेध माना गया है।

ग्रन्थ में वर्णित पूजन विधि अनुसार प्रभु को पीठे पर स्वच्छ लाल वस्त्र बिछा कर विधि अनुसार इन मन्त्रों के साथ आह्वान करें व उन्हें आसान दें।

इन मन्त्रों से करें श्री हनुमान जी का आह्वान

आवहु पवन कुमार विविध विप्र बुध गुरु धरण, बंदी कहऊ कर जोर l

होई प्रसन्न पुर वहु सफल मन्जु मनोरथ मोरि l l

राम कथा के रसिक तुम ,भक्ति राजि मति धीर l

आयसु आसन लीजिये ,तेज पुत्रज कपि वीर l

रामायन तुलसी कृत कहऊँ कथा अनुसार l

प्रेम सहित आसन गहहु ,आवहु पवन कुमार l

दोहा:    लाल देह लाली लसै अरु -धरु लाल लंगूर l वज्र देह दानव दलन ,जय जय जय कपिशूर ll

श्लोक:    अतुलितबलधामं हेमशैलाभदेहं,  दनुजवनकृशानुं ज्ञानिनामग्रगण्यम्। 

             सकलगुणनिधानं वानराणामधीशं,रघुपतिप्रियभक्तं वातजातं नमामि॥

            गोष्पदीकृत वारीशं मशकीकृत रक्षासम l रामायण महामालारत्नं बहु निलात्मजम l l

            अन्जनि नन्दन वीर जानकी शोक नाशनं l कपीश मक्षहन्तारम वंदे लंका भयंकरम l l

श्लोक : गणपति शिवगिरा,महावीर बजरंग l विध्न रहित पूरण करहु, रघु वर कथा प्रसंग l l

श्लोक : तत्रेव गंगा यमुना त्रिवेणी ,गोदावरी सिंधु सरस्वतीच l सर्वाणि तीर्थानि बसंति तत्र , यत्राच्तु तोदारि कथा प्रसंग : l

lपाठ के समापन पर इन मन्त्रों से दें विदाई

जै जै राजा राम की जै लक्ष्मण बलवान । जै कपीस सुग्रीव की जै अंगद हनुमान ॥

जै जै काग भुसुण्डि की जै गिरि उमा महेश । जै ऋषि भारद्वाज की जै तुलसी अवधेश ॥

प्रभु सन कहियो दण्डवत तुमहिं कहौ कर जोर । बार-बार रघुनाय कहिं सुरति करावहुँ मोर ॥

कामहि नारि पियार जिमि लोभहि प्रिय जिमि दाम।  तिमि रघुनाथ निरंतर प्रिय लागहँ मोहि राम ॥

बार – बार वर मांगहँ हर्ष देहु श्री रंग । पद सरोज अन पायनी भक्ति सदा सत संग ॥

प्रणत पाल रघुवंश मणि करुणा सिंध खरारि । गये शरण प्रभु राखिहैं सब अपराध बिसार ॥

कथा विसर्जन होत है सुनो वीर हनुमान, जो जन जह से आये हैं ,ते तः करो पयान।

श्रोता सब आश्रम गए,शम्भू गए कैलाश। रामायण मम ह्रदय मह ,सदा करहु तुम वास।

रामायण जसु पावन,गावहिं सुनहिं जे लोग। राम भगति दृढ़ पावहिं ,बिन विराग जपयोग।

रामायण बैकुण्ठ गई सुर गये निज-निज धाम । राम चंद्र के पद कमल बंदि गये हनुमान ॥

सियावर रामचंद्र की जय ॥

 

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here