Kuno : अग्नि और वायु की लड़ाई में मारी गई दक्षा,अब राजनीति

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श्योपुर। मंगलवार को मादा चीता दक्षा की मौत को लेकर अब राजनीति शुरू हो गई है। दक्षा की मौत दक्षिण अफ्रीका से लाए गए मेल चीता कोयलिशन अग्नि तथा वायु की आपसी लड़ाई में होना पाई गई। बताया जाता है कि मेटिंग के दौरान दक्षा को सिर पर अग्नि का पंजा लगने से वह गंभीर रूप से घायल हुई और इलाज के दौरान उसने दम तोड़​ दिया।

इधर,दक्षा की मौत के साथ ही कूनो पालपुर में तीन चीतों की मौत को लेकर सियासत भी तेज हो गई है। बुधवार सुबह उत्तरप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने ट्वीट कर लिखा कि कूनो में तीसरे चीते की मौत जानवरों पर क्रूरता का स्पष्ट मामला है। इसकी जांच हो और दोषियों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जानी चाहिए।

अखिलेश ने लिखा कि जब इन चीतों को दक्षिण अफ्रीका से लाया गया था, तब बड़ा कार्यक्रम आयोजित किया गया था। जिन लोगों ने यह कार्यक्रम किया था, उन्हें विदेशी चीतों के लिए सुरक्षित माहौल भी तैयार करना था।

इवेंट करने वाले लोग चीतों को बीमारी और आपसी संघर्ष से मुक्त माहौल देने में नाकाम रहे। यहां बता दें मादा चीता दक्षा से पहले उदय और साशा नाम के दो चीतों की मौत हो चुकी है। इसे लेकर प्रबंधन पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

विशेषज्ञों की बैठक में लिया गया था निर्णय
30 अप्रैल को हुई बैठक में राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण के महानिरीक्षक डा. अमित मल्लिक, भारतीय वन्यजीव संस्थान के डा. कमर कुरैशी, दक्षिण अफ्रीका से आए प्रो. एड्रियन टोर्डिफ तथा दक्षिण अफ्रीका के चीता मेटा पापुलेशन इनिशियटिव के विन्सेंट वेन डर मार्व उपस्थित थे।

इस बैठक में बाड़ा क्रमांक सात में मौजूद दक्षिण अफ्रीका से लाए गए चीता मेल कोयलिशन अग्नि तथा वायु को मादा चीता दक्षा के साथ मिलाने का निर्णय लिया गया।

बाडा क्रमांक सात और एक के बीच का गेट एक मई को खोल दिया गया। चीता मेल कोयलिशन छह मई को बाड़े में दा​खिल हुआ। पशु चिकित्सकों को मादा चीता दक्षा बाडे में घायल अवस्था में मिली थी।

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