Vat Savitri Vrat : इन मुहूर्तो में न करें पूजन, जानें पूजन विधि

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Vat Savitri Vrat  उज्जैन // प्रति वर्ष ज्येष्ठ मास की अमावस्या तिथि के दिन वट सावित्री का व्रत Vat Savitri Vratरखा जाता है।  इस दिन सुहागिन महिलाएं पति की लंबी आयु और अच्छे स्वास्थ्य (Good health) के लिए बरगद के पेड़ की पूजा करती हैं।

इस साल वट सावित्री व्रत के दिन काफी शुभ योग बन रहा है। इस साल (This year) इस व्रत पर सर्वार्थ सिद्धि योग के साथ सिद्धि योग  बन रहा है .जो  that काफी शुभ माना जाता है।

जानिए वट सावित्री व्रत का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि।

वट सावित्री व्रत  Vat Savitri Vrat  का मुहूर्त

ज्येष्ठ अमावस्या तिथि प्रारंभ: 29 मई को दोपहर 02 बजकर 54 मिनट से शुरू

अमावस्या (Amawasya)तिथि का समापन: 30 मई को शाम 04 बजकर 59 मिनट पर

अभिजीत मुहूर्त – सुबह 11 बजकर 57 मिनट से दोपहर 12 बजकर 50 मिनट से

ब्रह्म मुहूर्त – सुबह 04 बजकर 08 मिनट से 04 बजकर 56 मिनट से

सर्वार्थ सिद्धि योग- सुबह 07 बजकर 12 मिनट से 31 मई सुबह 05 बजकर 24 मिनट तक

इस मुहूर्तो में न करें वट सावित्री व्रत की पूजा

शास्त्रों राहुकाल, यमगण्ड, आडल योग, दुर्महूर्त और गुलिक काल में शुभ काम नही किए जाते है।
राहुकाल- 07:08 AM से 08:51 AM
यमगण्ड- 10:35 AM से 12:19 PM
दुर्मुहूर्त- 12:46 PM से 01:42 PM
गुलिक काल- 02:02 PM से 03:46 PM

वट सावित्री व्रत की पूजा विधि

Brahma Muhurta में स्नान आदि कर सुहागिन महिलाएं(Married women) साफ वस्त्र धारण कर  सोलह श्रृंगार कर लें।

 

 

लाल रंग के वस्त्र धारण करें तो यह शुभ होगा

बरगद के पेड़ के नीचे जाकर गाय के गोबर(Dung of cow) से सावित्री और माता पार्वती की मूर्ति बना लें।

if गोबर उपलब्ध नहीं है तो दो सुपारी में कलावा (Kalava) लपेटकर सावित्री और माता पार्वती(Parvati) की प्रतीक के रूप में रख लें।

चावल, हल्दी और पानी से मिक्स पेस्ट (Mix pest)को हथेलियों (At palm) में लगाकर सात बार बरगद में छापा लगाएं।

वट वृक्ष (Banyan tree)में जल अर्पित करें

Then फूल, सिंदूर, अक्षत, मिठाई, खरबूज सहित अन्य फल अर्पित करें।

14 आटा की पूड़ियों लें . हर एक पूड़ी में 2 भिगोए हुए चने (soaked gram)और आटा-गुड़ के बने गुलगुले रख दें . इसे बरगद की जड़ में रख दें।

फिर जल अर्पित कर दें और दीपक और धूप जला दें।

फिर (then) सफेद सूत का धागा , कलावा (Kalava)आदि लें. वृक्ष के चारों ओर परिक्रमा करते हुए बांध दें।

5 से 7 या फिर अपनी श्रद्धा के अनुसार परिक्रमा कर लें। इसके बाद बचा हुआ धागा वहीं पर छोड़ दें।

इसके बाद हाथों में भिगोए हुए चना(Gram) लेकर व्रत की कथा सुन लें। फिर इन चने को अर्पित कर दें।

then सुहागिन महिलाएं माता पार्वती और सावित्री के को चढ़ाए गए सिंदूर (vermilion)को तीन बार लेकर अपनी मांग में लगा लें।
अंत(at last) में भूल चूक के लिए माफी मांग लें।

इसके (Then)बाद महिलाएं अपना व्रत खोल सकती हैं।

व्रत खोलने के लिए बरगद के वृक्ष (banyan tree)की एक कोपल और 7 चना लेकर पानी के साथ निगल लें।

After this आप प्रसाद के रूप में पूड़ियां(Puries) , गुलगुले (dumpling)आदि खा सकती हैं।

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