उज्जैन // चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को राम नवमी मनाई जाती है। इस वर्ष श्रीराम नवमी 10 अप्रैल को मनाई जाएगी। मान्यताओं के अनुसार चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की नवमी को भगवान राम का जन्म हुआ था। राम नवमी के दिन रामचंद्र की पूजा और स्तुति फलदायी मानी जाती है। ऐसे करने से श्रीराम प्रसन्न होते है।
राम नवमी की पूजा विधि
राम नवमी के दिन सुबह जल्द उठकर स्नान करके साफ वस्त्र पहने। फिर हाथ में अक्षत लेकर व्रत रखने का संकल्प लें। भगवान सूर्य को जल चढ़ाए। फिर श्रीराम को पुष्प, 5 प्रकार के फल, मिठाई आदि अर्पण करें। प्रभु को तुलसी का पत्ता और कमल का फूल अर्पित करें। उसके बाद श्रीरामचंद्र स्तुति का पाठ करें।
राम नवमी के दिन पूजन के शुभ मुहूर्त
चैत्र शुक्ल नवमी तिथि शुरू – 10 अप्रैल, रात्रि 01.23 बजे से
चैत्र शुक्ल नवमा तिथि समाप्त – 11 अप्रैल, दोपहर 03.15 बजे तक
राम जन्मोत्सव का शुभ मुहूर्त – दोपहर 11.06 बजे से 01.39 बजे तक
राम नवमी के दिन सुकर्मा योग – दोपहर 12.04 मिनट तक
राम नवमी के दिन पुष्य नक्षत्र – पूर्ण रात्रि तक
राम नवमी के दिन विजय मुहूर्त – दोपहर 02.30 बजे से 03.21 बजे तक
राम नवमी के दिन अमृत काल – रात्रि 11.50 बजे से 01.35 बजे तक
राम नवमी के दिन राहुकाल – शाम 05.09 बजे से 06.44 बजे तक
श्रीरामचंद्र जी की स्तुति
श्री रामचंद्र कृपालु भजु मन हरण भव भय दारुणं। नव कंजलोचन, कंज मुख कर कंज पद कंजारुणं।।
कंन्दर्प अगणित अमित छबि नवनील नीरद सुंदर। पटपीत मानहु तडित रुचि शुचि नौमि जनक सुतवरं।।
भजु दीनबंधु दिनेश दानव दैत्यवंश निकन्दंन। रधुनंद आनंदकंद कौशलचंद्र दशरथ नन्दनं।।
सिरा मुकुट कुंडल तिलक चारू उदारु अंग विभूषां। आजानुभुज शर चाप धर सग्राम जित खरदूषणमं।।
इति वदति तुलसीदास शंकर शेष मुनि मन रंजनं। मम हृदय कंच निवास कुरु कामादि खलदल गंजनं।।
मनु जाहिं राचेउ मिलहि सो बरु सहज सुंदर सांवरो। करुना निधान सुजान सिलु सनेहु जानत रावरो।।
एही भांति गौरि असीस सुनि सिया सहित हियं हरषीं अली। तुलसी भवानिहि पूजी पुनिपुनि मुदित मन मन्दिरचली।।
दोहा
जानि गौरी अनुकूल सिय हिय हरषु न जाइ कहि।मंजुल मंगल मूल बाम अंग फरकन लगे।।


