भोपाल(Hardum.com)। चैत्र शुरू होने से पहले ही गर्मी शबाब पर है। सूरज के तीखे तेवर लोगों के होश उडा रहा है। मौसम शुष्क है और वातावरण में नमी भी कम। ऐसे में शरीर में सोडियम व पोटेशियम की कमी होना स्वाभाविक है। यह त्वचा रोग पैदा कर सकती है। त्वचा खुश्क होने से कई प्रकार की तकलीफ शुरु हो जाती है।
इससे बचने भारतीय प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति में अनके उपाय बताए गए हैं। पहले के जमाने में न तो इतने अस्पताल थे न ही उपचार की ऐसी आधुनिक सुविधा। हमारे बुजुर्ग इन प्राकृतिक चिकित्सा उपायों को अपनाकर ही स्वस्थ रहते आए हैं तो क्यों न हम भी इन उपायोें को अपनाए। इन्हें अपनाने में न तो कोई खर्च है,न शरीर पर कोई दुष्प्रभाव, तो क्यों न अपनाए जाएं ये नुस्खे।
तो आईए जाने कैसे करें शरीर की खुशकी दूर
आयुर्वेदचार्य के अनुसार चैत्र महीने की शुरुआत के साथ ही खानपान की आदत में भी बदलाव लाना चाहिए। इस समय गर्मी के तेवर तीखे होते जा रहे हैं।इस मौसम में दूषित जल से होने वाली बीमारी भी बहुत होती है इसलिए पानी उबालकर उसे ठंडा करके ही पिएं। नियमित भोजन लघु और सुपाच्य होना चाहिए।
दिन में लें अल्पनिंद्रा
दिन में अल्प मात्रा में सोएं इससे कफ नहीं बढ़ेगा। जिन्हें निम्न रक्तचाप की समस्या हो नमक.शकर युक्त पानी पिएं। इससे निम्न रक्तचाप की समस्या काफी हद तक कम होगी।गर्मी में नारियल पानी का सेवन भी शरीर के लिए फायदेमंद है।
नीम की पत्ती का सेवन करना चाहिए
गर्मी के मौसम में त्वचा रोग होने की आशंका ज्यादा होती है,इसलिए चैत्र और वैशाख माह में नीम की का सेवन करना चाहिए। नीम का रस तीक्ष्ण होता है जो कफ और पित्त का शमन करता है। इसके रस से रक्त भी साफ होता है। नीम के सेवन से खून की खराबीए जलन भी समाप्त होती है। नीम का सेवन रसए चूर्णए गोली या पत्ती को पीसकर भी किया जा सकता है। यदि इसका चूर्ण खाएं तो दो से तीन ग्राम चूर्ण प्रतिदिन सुबह नाश्ते के बाद खा सकते हैं।
ये वस्तुएं कम करती है कफ की शिकायत
गर्मी में शरीर में पित्त बढ़ता है। इस स्थिति में चंदन, आंवला, गुलाब, खसखस, बेल का शरबत या उसकी औषधि लेना लाभदायक होता है।


