नसों से जुड़ी हर बीमारी का इलाज है उमरिया के शेरा भाईजान के पास

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“मानव शरीर में नसें अलग-अलग अंगों से होकर गुजरती हैं। जब कोई अंग कमजोर होता है तो इसका असर नसों पर भी होता है। नसों की कमजोरी कई रोगों का कारण बन सकती है, इसलिए समय रहते उपचार करना जरूरी है।”

विक्की दाहिया,पाली। स्वस्थ शरीर के लिए नर्वस सिस्टम का मजबूत रहना जरूरी है। नसें महत्वपूर्ण अंग होती हैं जो शरीर में रक्त संचारित करती हैं। अच्छी सेहत के लिए यह बहुत अहम है। मानव शरीर में नसें अलग-अलग अंगों से होकर गुजरती हैं। जब कोई अंग कमजोर होता है तो इसका असर नसों पर भी होता है। नसों की कमजोरी कई रोगों का कारण बन सकती है, इसलिए समय रहते उपचार करना जरूरी है।

नर्वस सिस्टम में मामूली विकृति भी मनुष्य के लिए परेशानी का कारण बन जाती है। ऐसे में कोई अस्थि रोग विशेषज्ञ तो कोई न्यूरोलॉजिस्ट की सेवाएं लेता है। प्राचानी समय में जब एलोपैथी इतनी विकसित नहीं थी। तब लोग नसों के उपचार की देसी पद्धति का ही सहारा लेते थे।

शेरा भाई को है महारथ हासिल

एलोपैथी में आज भी आर्थराइटिस व सर्वाइकल से जुड़ी बीमारियों में अंग प्रत्यारोपण पर जोर दिया जाता है। यह कितना कारगर है,यह अलग विषय है।

इस मामले में लोगों के अलग- अलग अनुभव हैं,लेकिन उमरिया जिला मुख्यालय में 73 वर्षीय शेर मोहम्मद बीते करीब 50 सालों से ​हड्डियों व नसों से जुड़े अनेक असाध्य रोगों का उपचार बखूबी कर रहे हैं। इन्हें लोग प्यार से शेरा भाईजान के नाम से पुकारते हैं।

मप्र ही नहीं अनेक प्रांतों के रोगी अपने इलाज के लिए उनके पास पहुंचते हैं। प्रतिदिन 45 से 50 रोगियों का तांता उनके पास आज भी लगा होता है। शेरा भाई देश के अनेक राजनेता व जानी-मानी हस्तियों का इलाज कर उन्हें राहत पहुंचा चुके हैं।

मप्र व छत्तीसगढ़ में शेरा भाई का नाम जाना पहचाना है। उन्हें मांस पेशियों के खिचाव व नसों को ठीक करने में महारत हासिल है।

यह विधा उन्हें अपने पूर्वजों से विरासत में मिली है। उनकी इस सेवा के लिए देश के तत्कालीन रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर व महाराष्ट्र के तत्कालीन मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस सम्मानित भी कर चुके हैं।

नसों की कमजोरी के हो सकते हैं अनेक कारण
विशेषज्ञों के मुताबिक, शरीर के कुछ हिस्सों की नसें कमजोर या गतिहीन हो जाती हैं। कुछ लोगों के लिए यह समस्या थोड़े समय के लिए होती है लेकिन कुछ लोगों के लिए यह स्थायी भी हो सकती है। प्रभावित नस के प्रकार के आधार पर या तो नस से संबंधित शरीर का अंग ठीक से काम नहीं कर पाता या इन्सान कुछ महसूस नहीं कर पाता।

नसों की कमजोरी की सबसे आम वजह है इनमें किसी प्रकार की क्षति, नस विकृत होना, दर्द या सूजन से प्रभावित होना, नर्व सेल्स पर ट्यूमर का विकास, नसों पर विषाक्त पदार्थों का प्रभाव, नसों पर दबाव। नसें कमजोर होने के अन्य कारणों में शामिल हैं- बैक्टीरिया, वायरस के कारण होने वाले इंफेक्शन, ऐसी दवाइयां जो कि नसों को नुकसान पहुंचाए, जन्मजात दोष आदि।

कुछ बीमारियों या पोषण की कमी या जीवनशैली से सम्बंधित समस्याओं के कारण नसों की कमजोरी या तंत्रिका तंत्र की कमजोरी हो सकता है। इसके परीक्षण के लिए लक्षणों की जांच, ब्लड टेस्ट या नसों के टेस्ट का प्रयोग किया जाता है और इसका इलाज इसके कारण पर निर्भर करता है।

चक्कर आना,याददाश्त में कमी एक बड़ा संकेत

अगर नसें कमजोर हो रही हैं तो एक बड़ा संकेत है कि व्यक्ति की याददाश्त घटने लगती है। चक्कर आना भी एक महत्वपूर्ण लक्षण है क्योंकि खून का प्रवाह सही तरीके से नहीं हो पाता है।

एक अन्य संकेत है उठते और बैठते हुए आंखों के सामने अंधेरा छाना। सूंघने, देखने, सुनने, स्वाद लेने या स्पर्श अनुभव की शक्ति कमजोर होने लगती है। मांसपेशियों में कमजोरी और कंपकंपी होती है।

–तो साइटिका की परेशानी

कमजोर नसें कई बीमारियों को जन्म दे सकती हैं। नसों पर अगर दवाब पड़ता है तो साइटिका की परेशानी हो सकती है। नसों में खिंचाव और दर्द संबंधी समस्या को साइटिका कहा जाता है जो कूल्हों और जांघ के पिछले हिस्से में उत्पन्न होती है। यह परेशानी तब शुरू होती है, जब कूल्हे की नस को क्षति पहुंचती है।

नसों की कमजोरी मल्टीपल स्क्लेरोसिस का भी कारण बन सकती है। यह ऐसी बीमारी है जो रीढ़ की हड्डी और मस्तिष्क को प्रभावित करती है। इसमें किसी व्यक्ति को अक्षम करने की क्षमता है। यह एक ऑटोम्यून्यून बीमारी है।

हो सकता है बेल्स पाल्सी का शिकार

इसमें माइलिन शरीर की अपनी प्रतिरक्षा प्रणाली से खतरे में पड़ती है। माइलिन बिजली का संचालन करने वाले तारों पर इन्सुलेशन के कोट के समान है। व्यक्ति बेल्स पाल्सी का शिकार हो सकता है जिसमें चेहरे के एक तरफ की नसों में सूजन आ जाती है। इससे मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं।

बन सकती है स्ट्रोक की स्थिति

ब्रेन टिश्यू के हिस्से पर खून के थक्के बनने से स्ट्रोक की स्थिति बन सकती है। व्यक्ति पार्किंसन से भी पीड़ित हो सकता है। पार्किंसन यह न्यूरोडीजेनेरेटिव विकार है जो मस्तिष्क की कुछ नसों को धीरे-धीरे क्षति पहुंचाता है।

संतुलन बनाए रखने अपनाएं ये उपाय

सों की कमजोरी से छुटकारा पाने के लिए विटामिन, मैग्नीशियम, ओमेगा 3 फैटी एसिड युक्त चीजों का भरपूर सेवन करें। सेंधा नमक सूजन को कम करता है और मांसपेशियों व नसों के बीच के संतुलन को बेहतर बनाता है।

सेंधा नमक में मैग्नीशियम और सल्फेट पाया जाता है, जो इसके गुणों का मुख्य स्रोत होता है। सेंधा नमक के पानी से नहाने से नसों और मांसपेशियों की कमजोरी को दूर किया जाता है। अश्वगंधा और कैमोमाइल-टी भी फायदेमंद है।

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