पंडोखर सरकार के आगे जब परीक्षक ही हुए निरुत्तर

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भोपाल। विज्ञान के इस युग में जहां हर चीज तर्कों की कसौटी पर कसी जाती हो…,वहां आध्यात्मिक चमत्कार पर सहसा विश्वास नहीं होता….,लेकिन मंगलवार को राजधानी के कलियासोत मैदान में एक ऐसा ही दरबार सजा… जहां भिंड जिले के पंडोखर सरकार धाम के हनुमान भक्त पंडित गुरुशरण शर्मा के चमत्कार देख न केवल आमजन बल्कि मीडियाकर्मी भी दांतों तले उंगली दबाने का मजबूर हो गए…

…तो उनकी डोर कटना तय

हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ के बीच पंडित शर्मा मीडिया की हर कसौटी पर न केवल खरे उतरे…बल्कि उन्होंने उन वामपंथी विचारधारा वाले श्याम मानव जैसे लोगों को भी करारा जवाब दिया जो संतों की इस विधा पर सवाल उठाते रहे हैं…

पंडोखर सरकार ने साथ ही इस विधा का बेजा लाभ उठाने वाले नए नवेले संतों को भी सतर्क किया…पंडित शर्मा ने कहा कि पर्चा निकालकर दूसरों के मन की बात बताने की यह विधा पंडोखर सरकार की ही देन है… इसकी नकल करने वालों ने अपनी पतंग सही ढंग से नहीं उडाई तो उनकी डोर कटना तय है…

संदेहियों को किया निरुत्तर

बहरहाल,यह तो बात हुई आयोजन की..अब जानते हैं पंडोखर सरकार ने अपने चमत्कारों का डंका बजाकर कैसे संदेहियों को निरुत्तर किया…शाम सात बजे से शुरू हुआ दरबार,मध्य रात्रि तक जारी रहा। इस दौरान पंडित शर्मा ने ढाई सौ अधिक पर्चियों पर लिखी गई लोगों के मन की बात के आधार पर एक.एक कर संबंधित अर्जीदाता को मंच पर बुलाया और उनकी समस्या का समाधान किया। पूरे दिन मीडिया को अलग-अलग साक्षात्कार देते रहे पंडित शर्मा दरबार के दौरान भी पूरे समय तरोताजा दिखे…

संजय की आंखे भर आईं

शुरुआत में ही उन्होंने दरबार का लाइव प्रसारण कर रहे मीडियाकर्मियों को ही पंडाल में बैठे किसी भी शख्स को मंच पर लाने के चुनौती दी… पंडित शर्मा ने कहा.जिसे चाहे मंच पर बुलाओ,उसके मन की बात पहले ही रखी पर्ची में लिखी मिलेगी..हुआ भी यही। बंसल न्यूज के रिपोर्टर सूरज शर्मा ने भीड से एक अंजान वृद्ध को लेकर मंच पर पहुंचे। यहां पंडित शर्मा ने आत्महत्या की मंशा से नाराज होकर लापता हुई बहू ऋतु की सकुशल वापसी जल्दी ही होने की बात कही तो मौके पर मौजूद वृद्ध के पुत्र संजय की आंखे भर आईं…

जिसे दिल चाहे,उसे मंच पर लाएं….,

उन्होंने पर्चे पर पहले से लिखी बातों को सही बताते हुए पंडित शर्मा के चरणों में दंडवत किया…बाद में पंडित शर्मा ने स्क्रीन पर यह पर्चा सार्वजनिक कर मीडियाकर्मियों के भ्रम को दूर किया…पंडोखर सरकार ने मीडियाकर्मियों को चुनौती देते हुए कहा कि उन्हें पूरा मौका दिया जाएगा….,वे जिसे दिल चाहे,उसे मंच पर लाएं….,

रिपोर्टर सूरज ने इसके बाद उत्तर प्रदेश से अपनी बीमार मां को लेकर आए युवक को मंच पर भेजा। महाराज जी ने पलक झपकते ही पर्ची पर लिखी युवक की समस्या सार्वजनिक कर उसकी मां के जल्दी ही प्रेत बाधा से मुक्त होने का भरोसा दिलाया। मीडियाकर्मियों में बढ़ती जिज्ञासा और महाराज की परीक्षा लेने की उत्सुकता बढ़ती रही..यह देख पंडित शर्मा ने कहा.है मेरे नारदों सबको पूरा मौका मिलेगा..

एक-एक बात हुई सच साबित

जिसे दिल चाहे ले आओ,दरबार में सबकी समस्या का पूरे पारदर्शी तरीके से समाधान होगा..श्री हनुमान जी की कृपा से पर्चे पर पहले से लिखी गई हमारी एक-एक बात सच साबित होगी…पंडित शर्मा की चुनौती को मीडिया कर्मियों ने भी उतनी ही गंभीरता से लिया… और न्यूज 18,न्यूज 24,डीएनएन और अन्य चैनलों के मीडियाकर्मियों के बुलावे पर एक-एक कर अनजान लोग आते रहे..

बताई मन की बात

और पंडोखर धाम उनकी समस्याओं को उनके बिना बताए ही लिखित में बताए समाधान सामने आते रहे..यही नहीं महाराज जी ने मौके पर पहुंचे बंसल न्यूज के हेड शरद द्विवेदी को अपने पास ही बैठाकर आगंतुकों की सभी भरी हुई पर्चियां दिखाईं…पंडित शर्मा ने मंच पर पहुंचे एक युवक के जेब में रखे नोटों के नंबर,माता मंदिर क्षेत्र भोपाल की एक महिला के पर्स पर रखे चार अलग-अलग एटीएम के नंबर…,आधार नंबर हूबहू बताकर मंचासीन मीडियाकर्मी को भी दांतों तले अंगुली दबाने पर मजबूर कर दिया…

दी पुनर्जन्म लेने की लिखित जानकारी

यही नहीं महाराष्ट्र से आए एक युवक की जमीन पर उसकी ही बहन द्वारा कब्जा किए जाने…,एक अन्य युवक की जमीन का खसरा क्रमांक बताकर वहां जल निकलने…,एक दंपत्ति के लापता बालक के जल में डूब कर मरने व अगले दो वर्ष में उसके उनके यहां ही पुनर्जन्म लेने की लिखित जानकारी पहले से लिखे पर्चे पर पढाकर हतप्रभ कर दिया….

वहीं एक अन्य व्यक्ति के एक करोड रुपए से अधिक उधारी में फंसे होने…इनकी अदायगी जल्दी होने…,राजधानी के एक राजनेता को विधानसभा का टिकट मिलने जैसी बातें पंडित शर्मा ने पहले ही उनके नाम की लिखी पर्चियों में लिख रखी थी।

‘ईश्वरीय विधा की इस ताकत से इंकार नहीं’

इनके गवाह शरद द्विवेदी भी रहे..शरद को भी अंतत: यह स्वीकार करना पड़ा कि ईश्वरीय विधा की इस वास्तविकता से इंकार नहीं किया जा सकता..जो इस विधा पर भरोसा रखते हैं,उन्हें तर्कों में न उलझ कर ईश्वरीय आराधना में खुद का मग्न करना चाहिए..लेकिन चमत्कारों की इस विधा की पुष्टि और प्रमाणिकता की ओर बढा जाना चाहिए..ताकि विश्वास व संदेह के बीच की खाई को कम किया जा सके।

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