राजस्थान के सीकर जिले मे लगता है खाटूश्यामजी का लक्खी मेला

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राजस्थान के सीकर जिले के खाटू कस्बे में खाटूश्यामजी मंदिर का लक्खी मेला 6 मार्च से शुरू होगा, जो 15 मार्च तक चलेगा। इसे खाटू फाल्गुन मेला के नाम से भी जाना जाता है। इस मेले में लाखों भक्तों के आने की अनुमान है। यह राजस्थान के सबसे बड़े मेलों में से एक है। धर्म ग्रंथों के अनुसार भगवान खाटूश्याम घटोत्कच (बर्बरीक) के पुत्र हैं। जिन्होंने श्रीकृष्ण के कहने पर खुद अपना सिर काट लिया है। भगवान श्रीकृष्ण के वरदान स्वरूप उनकी पूजा श्याम नाम से की जाती है।

भगवान श्रीकृष्ण ने क्यों मांगा बर्बरीक से शीश

पौराणिक कथा के अनुसार घटोत्कच और दैत्य मूर की बेटी मोरवी के बेटे बर्बरीक ने तपस्या से कई दिव्य अस्त्र-शस्त्र प्राप्त किए थे। उन्होंने अपनी मां से वादा किया था कि महाभारत के युद्ध में कमजोर पक्ष का साथ देंगे। उन्होंने कौरवों का साथ दिया। श्रीकृष्ण जानते थे कि अगर बर्बरीक कौरवों का साथ देंगे, तो पांडवों का हारना तय है। तब कान्हा ने बर्बरीक से दान में उसरा सिर मांग लिया। उन्होंने खुशी से अपना शीश दे दिया। बर्बरीक के इस बलिदान से श्रीकृष्ण ने उन्हें आशीर्वाद दिया। वे कलयुग में उनके नाम श्याम से पूजे जाएंगे।

खाटूश्यामजी में क्यों पूजा जाते हैं बर्बरीक

मान्यता के अनुसार बर्बरीक शीश राजस्थान के सीकर जिला मुख्यालय से लगभग 45 किमी दूर स्थित छोटे से कस्बे खाटू में दफनाया गया। एक गाय उस स्थान पर आकर हर दिन दूध की धारा बहाती थी। जब लोगों ने यह चमत्कार देखा, तो खुदाई की गई। जिससे एक शीश प्रकट हुआ। जिसे कुछ दिनों के लिए एक ब्राह्मण को दे दिया गया। एक बार खाटू नगर के राजा को सपने में मंदिर निर्माण और शीश मंदिर में सुशोभित करने के लिए प्रेरित किया। तब उस स्थान पर मंदिर का निर्माण किया गया। 1027ई में रूपसिंह चौहान और उनकी पत्नी नर्मदा कंवर ने मूल मंदिर बनवाया था।

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