दिलदार मा​लकिन (एक सत्यकथा)

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“शराब की लत में डूबे एक ढाबा संचालक ने अपनी पत्नी की जरूरतों पर ध्यान देना बंद कर दिया। सेक्स की आग में जलती पत्नी की निगाह गठीले बदन के नौजवान नौकर से ​मिली। आंखें चार होते ही दोनों प्यार में डूब गए। दोनों को सेक्स की भूख थी। वे मौका मिलते ही अपने जिस्म की प्यास बुझाते। पति को इसमें बाधक देख एक दिन दोनों ने ऐसा निर्णय लिया कि एक हंसता-खेलता परिवार उजड़ गया। शराब ने परिवार को कहीं का नहीं छोड़ा।”  आइए,जानते हैं क्या है मामला….

फरवरी का महीना आते,आते जहां मध्यप्रदेश के अधिकांश हिस्सों में ठंड की विदाई होने लगी थी। वहीं घने वनों से ढके सतपुड़ा पहाड़ों के बीच बसे बैतूल जिले की हवा में अभी हाड़ कंपा देने वाली ठंडकर घुली हुई थी।

एक फरवरी की बात है। सुबह के कोई आठ—साढ़े आठ बजे होंंगे। तब ही सारणी- छतरपुर रोड पर स्थित बगडोना के आशियाना ढाबे के एक कमरे से तेजी से काला धुआं निकला। यह देख ढाबा संचालक समीर कुछ नौकरों को संग लेकर कमरा नंबर 101 की तरफ दौड़ पड़ा।

वास्तव में इस ढाबा का मूल मालिक,इसी कमरा नंबर 101 में रहने वाला 38 वर्षीय शैलेष साकरे या कुछ महीने पहले तक शैलेष खुद ही अपना ढाबा चलाता था । उस समय इसका नाम मिलन ढाबा हुआ करता था। कुछ समय पहले व्यक्तिगत परेशानियों के कारण शैलेष ने यह ढाबा किराये पर समीर को दे दिया था। जो इसे आशियाना ढाबा नाम देकर चला रहा था।

ढाबा किराये पर देने के बाद भी शैलेष इसके कुछ कमरों में अपने परिवार के साथ रहता था। बसे पारिवारिक विवाद के कारण कुछ दिन पहले उसकी पत्नी मालती (बदला नाम) गुस्सा होकर इटारसी चली गई थी। इसलिए इन दिनों कमरे में शैलेष अपनी 14 वर्षीय बेटी और पालतू जर्मन शेफर्ड कुत्ते के साथ रह रहा था।

कुछ ही देर पहले समीर ने शैलेष की बेटी को स्कूल जाते देखा था। समीर को लगा कि शैलेष कमरे में अकेला है। कमरे से काला धुंआ निकलते देख उसे संदेह हुआ कि शायद चाय—नाश्ता पकाते समय लापरवाही के कारण कमरे में आग लग गई है।

लेकिन कमरे में पहुंचते ही वहां का नजारा देखकर समीर के पैरों तले की जमीन खिसक गई। कमरे में बिस्तर पर लेटा शैलेष धूं-धूं कर जल रहा था। यह देखकर समीर ने किसी तरह नौकरों की मदद से आग पर काबू पाया। इसके बाद उसने तत्काल घटना की सूचना सारणी थाना टीआई रत्नाकर हिंगवे को दे दी।

सीसीटीवी कैमरे में भागते हुआ कैद

पुलिस ने मौके पर जाकर पाया कि बिस्तर पर पड़ा शैलेष का शरीर बुरी तरह जल चुका था। मौके पर ही साफ था कि शैलेष की मौत हो चुकी है। उसके सिर पर चोट के निशान भी दिख रहे थे। कमरे में पेट्रोल की गंध भरी थी। जिससे पुलिस को शक हो गया कि संभवतः सिर पर हमलाकर शैलेष की हत्या की गई।

हमलावर ने शव को जलाने की कोशिश की है। इसलिए टीआई रत्नाकर हिंगवे ने मामले की जानकारी एसडीओपी रोशन जैन और एसपी बैतूल सिमाला प्रसाद को दे दी। जिससे कुछ ही देर में खुद एसडीओपी श्री जैन भी मौके पर पहुंच गए।

संयोग से ढाबे में चारों तरफ सीसीटीवी कैमरे लगे थे। इसलिए घटना को समझने के लिए एसडीओपी रोशन जैन ने सीसीटीवी कैमरे चेक किए।

जिसमें एक युवक आग की लपटे उठते ही कमरा नंबर 101 से निकलकर भागते दिखाई दिया। जिसे देखते ही मृतक शैलेष की बेटी और समीर ने पहचान लिया कि भाग रहा युवक हेमंत बाबरिया था। जो कुछ दिनों पहले तक शैलेष के ढाबा में नौकरी करता था।

किशोरी बेटी ने उगला राज

शैलेष के शव को पीएम के लिए भेजकर पुलिस ने प्रारंभिक पूछताछ की। जिसमें मृतक की बेटी ने बताया कि हेमंत की मम्मी से दोस्ती थी। इस बात की जानकारी पापा को लगने पर मम्मी- पापा में झगड़ा होने लगा था।

जिससे हेमंत को पापा ने नौकरी से निकालकर ढाबा किराये पर दे दिया था। इस बात पर भी पापा-मम्मी में झगड़ा हुआ। इसके बाद मम्मी इटारसी जाकर रहने लगी हैं। कहानी काफी कुछ साफ हो चुकी थी।

हेमंत जब काम छोड़ चुका था तो फिर सुबह-सुबह शैलेष के कमरे में क्या करने आया था। फिर आग लगते ही वह मौके से क्यों भाग निकला। हेमंत और मृतक की पत्नी में दोस्ती की बात खुद मृतक की बेटी ही बता चुकी थी।

इसलिए एसपी सिमाला प्रसाद (In Photo) ने पूरी कहानी को समझते हुए मृतक की पत्नी को हिरासत में लेकर पूछताछ करने के निर्देश दे दिए।

जिससे अगले दिन ही यह साफ हो गया कि शैलेष की हत्या मालती और उसके प्रेमी हेमंत ने योजना बनाकर की है। मालती को गिरफ्तार कर हेमंत की तलाश शुरू हुई।

5 दिन तक जंगल में छिपा रहा भूखा—प्यासा

एसपी सुश्री प्रसाद ने एसडीओपी रोशन जैन के नेतृत्व में टीआई रत्नाकर हिंगवे के साथ सारणी एवं पाथाखेड़ा थाना पुलिस की एक टीम गठित की। जिसने मोबाइल लोकेशन के आधार पर पांचवे दिन मुख्य आरोपी हेमंत बाबरिया को रावणदेव के जंगल से गिरफ्तार कर लिया। जहां वह पांच दिन से भूखा प्यासा बैठा था। इसलिए पुलिस ने पहले तो उसे खाना खिलाया फिर हत्या के बारे में पूछताछ की।

हेमंत ने भी बिना किसी लाग लपेट के अपना अपराध स्वीकार कर लिया।उसने बताया कि मालकिन मालती मेरा उपयोग अपने तन की आग बुझाने के लिए करने लगी थी। इस बात की जानकारी मालिक शैलेष को हो जाने पर विवाद के बाद मैं इटारसी चला गया था। लेकिन मालकिन मुझसे लगातार संबंध कायम रखना चाहती थी। इसलिए उन्होंने इटारसी आकर मेरे ऊपर दबाव बनाया कि मैं शैलेष की हत्या कर दूं। ताकि वे हमेशा मेरे साथ रह सके।

वह किसी भी मर्द को अपना दीवाना बना सकती है

उन्होंने इसके बदले में मुझसे शादी कर ढाबा मेरे नाम करने का वादा भी किया था। लेकिन में हत्या नहीं करना चाहता था।इसलिए जब मैने ऐसा करने से मना किया तो मालती ने धमकी दी ​कि यह काम वह किसी और से करवा लेगी।

मालती का मजबूत इरादा देख मैं भी कुछ पल के लिए डर गया। मालती दिलकश है,वह किसी भी मर्द को अपना दीवाना बना सकती है। यह संभव था कि जिससे वह शैलेष की हत्या करवाती बाद में उसी के साथ रहने लगे। ऐसा होने से मालती और ढाबा दोनों मेरे हाथ से निकल जाते। यह सोच मैं शैलेष की हत्या के लिए राजी हो गया।

पेट्रोल डालकर आग लगा दी

हेमंत ने बताया कि घटना के दिन में योजना बनाकर इटारसी से अल सुबह यहां पहुंचा। शैलेष की बेटी के स्कूल चले जाने के बाद ढाबे में पीछे के रास्ते से दाखिल हुआ। सीधे कमरा नंबर 101 में पहुंचा। देखा कि शैलेष बिस्तर पर लेटा हुआ है। उसे संभलने का मौका दिए बिना,मैंने उसके सिर पर हथौड़ी से चार-पांच बार वार किए। इतने वार के बावजूद शैलेष की सांस चल रही थी। लेकिन सिर पर चोट लगते ही वह बेहोश हो गया।

शैलेष को पूरी तरह खत्म करने के इरादे से मैंने उसके ऊपर पेट्रोल डालकर आग लगा दी। ताकि यह आत्महत्या लगे। इसके बाद मैं भागकर केदारी उमरी होते हुए रावणदेव के जंगल में जाकर छुप गया। पुलिस मालती को पहले ही गिरफ्तार कर चुकी थी। इसलिए हेमंत द्वारा अपना अपराध स्वीकार कर लेने पर उसने हेमंत को भी अदालत में पेश कर जेल भेज दिया। जिसके बाद यह कहानी सामने आई।

शराब की लत ने बर्बादी की ओर धकेला
सारणी- छतरपुर रोड़ पर बगडोना में मिलन ढाबा चलाने वाले शैलेष साकरे की शादी कोई सोलह साल पहले मालती के साथ हुई थी। शादी के दो साल बाद मालती ने एक बेटी को जन्म दिया। जो अब 14 साल की हो चुकी है।

शैलेष से अपने ढाबे में आने वाले ग्राहकों को शराब पीने के अलावा कुछ और सुविधाएं भी दे रखी थी। जिससे होने वाली मोटी कमाई के चलते उसकी जिंदगी आराम से बीत रही थी। लेकिन इसी दौरान धीरे-धीरे शैलेष को भी शराब की लत लग गई। समय के साथ उसकी यह लत ऐसी बड़ी की वह दिन—रात नशे में डूबा रहने लगा।

इससे देर रात ढाबा बंद कर जब शैलेष कमरे में पहुंचता था तब तक वह इतनी शराब पी चुका होता था कि अपनी पत्नी मालती को प्यार करना तो दूर उससे बात करने लायक भी नहीं रह जाता था। इसलिए धीरे-धीरे मालती अपने तन की आग को मन में समेटे भीतर ही भीतर सुलगने लगी थी।

काम की तलाश में भटकते हुए पहुंचा हेमंत

इसी बीच इटारसी निवासी हेमंत बाबरिया काम की तलाश में भटकते हुए मिलन ढाबा पहुंचा। शैलेष ने उसे अपने ढाबे पर काम देने के अलावा रहने के लिए ढाबे का एक कमरा भी दे दिया। चूंकि हेमंत दिन-रात ढाबे में रहता था इसलिए धीरे-धीरे उसका मालती के अलावा उसकी बेटी से भी परिचय हो गया। साथ ही मालती के घर में पले जर्मन शेफर्ड नस्ल के कुत्ते को दोनों वक्त समय पर खाना देने का काम भी हेमंत ही करता था इसलिए कुत्ता भी हेमंत को अच्छी तरह पहचानने लगा।

गठीले बदन का 28 वर्षीय (In Photo) हेमंत , मालती से उम्र में लगभग 10 साल छोटा था। मालती तो लंबे समय से मर्द की नजदीकी के लिए तरस रही थी। इसलिए हेमंत जब भी उसके सामने पड़ता मालती उसे देखकर ठंडी सांस भरकर रह जाती।

हेमंत ढाबे के पीछे पड़े आंगन में खुले में नहाता था। इसलिए एक रोज मालती की नजर नहा रहे हेमंत पर पड़ी। उसे देखकर मालती ने तय कर लिया कि वह हेमंत को अपने बिस्तर तक लाकर ही मानेगी। उस रोज के बाद वह हेमंत के घर आने पर उससे खूब हिलमिल कर बातें करने लगी। मालती हेमंत का ध्यान भी रखती।

मालती सुंदर तो थी ही इसलिए धीरे-धीरे हेमंत को यह बात समझ में आने लगी कि मालकिन उससे कुछ और भी चाहती है। इसी बीच एक रोज मालती ने मौका देखकर हेमंत से कहा कि इस बार जब अपने घर जाओ तो मां से अपनी नजर उतरवा लेना ।

अरे! ऐसा क्या, मुझे किसकी नजर लगने लगी।

मालती की बात सुनकर हेमंत ने कहा।

मेरी ।

आपकी, आपकी क्यों ?

तुमको नहीं पता जब तुम पीछे आंगन में नहाते हो तब मैं

रोज तुम्हें छुपकर देखती हूं।

मैंने तो कभी नहीं देखा आपको देखते हुए।

तुम ध्यान ही कहां देते हो मेरे ऊपर…

सचमुच बहुत सेक्सी बॉडी है तुम्हारी।

देखकर मन करता है कि तुम्हें लॉकेट में बंद कर गले में लटका लूं।

ये क्या कह रही है आप ?

मालती बोली- साफ-साफ कह रही हूँ। अगर इसके बाद भी तुम्हारी समझ में नहीं आए तो मेरी बदकिस्मती है।

अरे! ऐसा नहीं है।  भाभी अगर भैया को मालूम चल गया तो मेरी नौकरी चली जाएगी।

जवाब में मालती बोली— उस शराबी को खुद का होश नहीं रहता। सच कहूं तो तंग आ चुकी हूँ शैलेष से। अब तुम से खुशी मांग रही हूँ। दे सकते हो तो कल बता देना।

हेमंत भी मन ही मन मालती का सानिध्य पाने का ख्वाब पाले हुए था। मालती की ओर से खुला आफर पाकर उसने कहा…और अभी बता दूं तो ?

अब मुंह से न बोलो,मैं समझ गई। शाम को जब तुम कुत्ते को टहलाने के लिए आओगे तब में तुम्हें पीछे वाले कमरे में मिलूंगी।

पागलों की तरह उससे लिपट गई

मालती की तरफ खुला निमंत्रण पाकर शाम को हेमंत,मालती के बताए कमरे में पहुंचा तो मालती उसे देखते ही पागलों की तरह उससे लिपट गई।

जिसका नतीजा यह हुआ कि पहली मुलाकात में ही उनके बीच शारीरिक संबंध बन गए। पति की शराबखोरी के कारण मालती को मर्द की जरूरत थी और हेमंत तो कुंवारा था ही। इसलिए उस रोज के बाद दोनों आए दिन मौका निकालकर एक दूसरे से अपने तन की प्यास बुझाने लगे।

इसी दौरान एक रोज हेमंत ने मालती को सलाह दी कि क्यों न हम शराब की लत छुड़वाने के लिए शैलेष को इटारसी के नशा मुक्ति केन्द्र में भर्ती कर दें।अब मुझे उससे और उसकी शराब से कोई मतलब नहीं। अच्छा ही पीने दो। शराब छूट गई तो हम दोनों को मिलने में मुश्किल होगी।

शराब किसी की आज तक छूटी है जो इसकी छूटेगी

अरे यार! शराब किसी की आज तक छूटी है जो इसकी छूटेगी। वह तो मैं इसलिए कह रहा था कि दो चार महीने शैलेष इटारसी में रहेगा तो यहां हम दोनों खुलकर प्यार कर सकेंगे। हेमंत ने मालती को समझाया तो वह इसके लिए राजी हो गई।

कुछ दिनों बाद शैलेष के लाख मना करने पर दोनों उसे ले जाकर इटारसी के नशा मुक्ति केन्द्र में भर्ती कर आए। इसके बाद वापस आकर हेमंत मालिक की तरह ढाबा संभालने और मालती के साथ ऐश करने लगा।

बेटी काफी दुखी थी

इधर,शैलेष के चले जाने से उसकी बेटी काफी दुखी थी। एक तो वह पिता को काफी प्यार करती थी। दूसरे हेमंत के साथ मां की दोस्ती पर उस शक भी होने लगा था। इसी बीच उसने देखा कि पिता के जाने के बाद हेमंत रात को मां के कमरे में सोने लगा है। इससे उसका शक ​और गहरा गया।

इसके बाद बेटी ने पिता को वापस लाने की जिद करना शुरू कर दिया। मालती ने उसकी बात नहीं सुनी तो एक रोज वह स्वयं इटारसी पहुंचकर पिता को वापस ले आई। रास्ते में उसने अपनी मां की करतूत भी शैलेष का बता दी।

निर्वस्त्र स्थिति में बिस्तर पर पकड़ लिया

शैलेष को पहले ही शक था,लेकिन बेटी की बात सुन यह पुख्ता हो गया। इटारसी से आने के बाद वह दोनों पर नजर रखने लगा। इसी बीच 10 जनवरी के रोज आधी रात में नींद टूटने पर जब शैलेष ने देखा कि मालती बिस्तर पर नहीं है। वह दबे पांव हेमंत के कमरे में पहुंच गया। जहां उसने हेमंत और मालती हो पूरी तरह निर्वस्त्र स्थिति में बिस्तर पर पकड़ लिया।

मालती को तो अब हेमंत के अलावा कुछ और नहीं सूझ रहा था

इसके बाद मचे विवाद के कारण हेमंत नौकरी छोड़कर इटारसी में आकर रहने लगा। हेमंत के चले जाने से मालती घायल शेरनी की तरह हो गई थी। जिससे वह आए दिन पति से विवाद करने लगी। शैलेष चाहता था कि उसका घर टूटने से बच जाए।

उसे स्वयं की गलती भी समझ में आ चुकी थी। इसलिए परिवार को समय देने के लिए उसने ढाबा किराये पर दे दिया। खुद ढाबे के अंदर बने कमरों में परिवार के साथ रहने लगा।

लेकिन मालती को तो अब हेमंत के अलावा कुछ और नहीं सूझ रहा था। हेमंत भी मालती का दीवाना हो चुका था। फोन परन दोनों संपर्क में थे।

एक दिन मालती ने उसके समक्ष शादी का प्रस्ताव रखा तो हेमंत ने हां कर दी। इसके बाद मालती ने योजनाबद्ध तरीके से पति से विवाद​ किया और फिर बहाना बनाकर वह इटारसी आकर रहने लगी। यहां उसने हेमंत से मुलाकात कर शैलेष को रास्ते से हटाने को कहा।

किसी और से शैलेष की हत्या करवाऊंगी

मालती ने प्रस्ताव रखा कि शैलेष की हत्या के बाद वह न केवल उसके साथ शादी कर लेगी बल्कि ढाबा भी हेमंत के नाम कर देगी। हेमंत मालती के साथ मस्ती से जिंदगी तो बिताने को राजी था लेकिन इसके लिए वह हत्या जैसा अपराध नहीं कर सकता था।

इसलिए उसने इस प्लान में आनाकानी की तो मालती बोली ठीक है मैं किसी और से शैलेष की हत्या करवाऊंगी।

मालती की यह बात सुनकर हेमंत को लगा कि ऐसे में मालती और शैलेष की दौलत दोनों हाथ से जा सकते हैं इसलिए वह इस काम के लिए राजी हो गया।  जिसके बाद योजना अनुसार एक फरवरी को जब शैलेष की बेटी स्कूल चली गई तक हेमंत ने ढाबा में पीछे से दाखिल होकर कमरे में सो रहे शैलेष के सिर पर हथौड़ा मारकर उसकी हत्या कर दी।

भागते समय वह सीसीटीवी कैमरे कैद हो गया। इसके चलते मालती और हेमंत के मंसूबे पूरे नहीं हो सके। लेकिन शराब की लत से एक हंसते—खेलते परिवार को बर्बाद कर दिया। Main Demo photo

(कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित एवं जागरण भोपाल से साभार)। Written by » अब्दुल रहमान

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