बासी खाने की परंपरा को छग मुख्यमंत्री बघेल ने किया पुनर्जीवित: कविता बाबर

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धमतरी । प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने जब से राज्य की बागडोर संभाली है, तब से निरंतर गांव, गरीब और किसानों के प्रति सहानुभूतिपूर्वक योजनाएं बनाकर उसे धरातल पर उतारा जा रहा है। छत्तीसगढ़ की संस्कृति और परंपरा को पुनर्जीवित | करने का कार्य सरकार कर रही है। विलुप्त हो रही बासी खाने कर परंपरा को मुख्यमंत्री ने पुनर्जीवित किया है। यह बात जिला पंचायत धमतरी की वन सभापति कविता योगेश बाबर ने कही।
उन्होंने कहा कि गर्मी बढ़ने के बाद से वे प्रतिदिन बोरे बासी खाती हैं। चाहे वह छत्तीसगढ़ी तीज-त्योहार हो या स्थानीय खेलकूद हो, सभी परम्पराएं जो विलुप्ति की कगार पर थीं, उसे पुनर्जीवित कर जनमानस को प्रोत्साहित किया जा रहा है। शासन से योजना बनाकर और पुरस्कार राशि देने से लोगों में अपनी संस्कृति व परंपरा के लिए एक उत्साह का सैलाब उमड़ पड़ा है।

एक मई को अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस मनाया जाता है। सामान्यतः पुराने समय में मजदूर वर्ग में बासी खाकर अपने कार्य पर जाने की परंपरा थी। विगत कुछ समय से यह परंपरा विलुप्त होती जा रही थी। लोग बासी को मजदूरों का भोजन समझते थे। लेकिन आज के इस आधुनिक युग में जहां लोग पाश्चात्य खानपान व
आहार के प्रति आकर्षित हो रहे थे उस परंपरा को तोड़ने का कार्य भूपेश बघेल ने किया और बोरे बासी न केवल छत्तीसगढ़ में अपितु राष्ट्रीय स्तर पर प्रचारित व प्रोत्साहित किया। जैसा कि हम जानते हैं कि वैज्ञानिक तथ्यों से भी यह सिद्ध हो गया कि बासी में भरपूर मात्रा में प्रोटीन, विटामिन होता है। गर्मी के दिनों में इसका सेवन करने से मनुष्य

के शरीर का तापमान सामान्य बना रहता है वडिहाइड्रेशन की शिकायत भी नहीं होती है।

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