ज्येष्ठ-वैशाख तरबतर तो क्या सावन-भादों रहेंगे सूखे?

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भोपाल। अप्रैल के अंतिम दिन यानी रविवार को प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में ओलावृष्टि व जोरदार बारिश हुई। इंदौर में तो 128 साल बाद मूसलाधार बारिश हुई। मालवा-​निमाड़ के अन्य हिस्से भी तरबतर हुए।

मौसम के मिजाज में आए इस बदलाव को देखते हुए आशंका जताई जा रही है कि वैशाख में गर्मी की जगह सर्द मौसम..तो क्या सावन-भाद्र मास सूखे रहेंगे? फिर खरीफ की फसल का क्या होगा ..? और दीपावली बाद बोई जाने वाली रबी का ?दरअसल,मौसम के​ मिजाज में आए इस बदलाव से मौसम ​विज्ञानी भी हैरान है। वैशाख की तपती दोपहरी की जगह आकाश में मंडराते बादल,तेज हवा के साथ बरसते ओले व तेज बारिश..बेमौसम की इस बरसात को लेकर किसान ज्यादा चिंतित हैं। हो भी क्यों न..? मौसम के बदले मिजाज से शहरियों को भले कोई फर्क न पड़े..लेकिन खेती का पूरा दारोमदार तो मानसून पर ही टिका है।

128 साल बाद देखी वैशाख में ऐसी बारिश

अब प्रदेश के प्रमुख शहर इंदौर को ही लीजिए..सुबह से उमड़-घुमड़ रहे बदरा दोपहर होते-होते बरसे..और ऐसे बरसे कि बीते 128 साल का रिकॉर्ड तोड़ डाला।मौस​म विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार,128 साल बाद वैशाख में इंदौर में ऐसी मूसलाधार बारिश हुई।

इससे पहले सन् 1895 में 24 घंटे में 51.1 मिमी.दर्ज हुई थी..और आज तो इससे ज्यादा हो गई। वह भी ओले के साथ। इंदौर ही नहीं,खंडवा,खरगोन,गुना सहित मालवा-निमाड़ के अधिकांश हिस्सों में बदरा बरसे और खूब बरसे।

ऐसे कि संडे को सेली​ब्रेट करने का मन बना रहे शहरियों को घर में दुबकने को मजबूर कर दिया..कहा.भैया घर में रहो…इसी में भलाई है। कुछ दया आई तो शाम को माहौल मामूली खुशनुमा हुआ और युवा जोड़े कॉफी कैफे पर कॉफी का लुत्फ उठाने जरूर जा पहुंचे। जोड़ों का प्लान तो बहुत कुछ था,लेकिन मौसम के मिजाज को देखते हुए वे भी सहम गए।

ऐसा क्या हो गया मौसम को ,क्या पड़ोसी मुल्क का हाथ ?
भरे वैशाख में गर्मी की जगह सर्दी का अहसास..ऐसा क्या हो गया मौसम को। तो भैया इतना जान लो..इसमें भी पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान का हाथ है।अब वहां लोग महंगाई व दीगर चीजों से परेशान तो आपको कैसे चैन से बैठने दें।

भोपाल स्थित मौसम केंद्र के मौसम विज्ञानी एच​. ​एस. पांडे के मुताबिक वर्तमान में दक्षिण पाकिस्तान व उससे लगे पश्चिमी राजस्थान के ऊपर एक प्रेरित हवा का चक्रवात बना हुआ है। एक पश्चिमी विक्षोभ चक्रवाती घेरे के रूप में मध्य पाकिस्तान में है।

वही दक्षिण पश्चिमी उप्र में चक्रवाती हवाओं का घेरा बना हुआ है। इसके अलावा दक्षिणी छत्तीसगढ़ के ऊपर चक्रवाती हवाओं का घेरा बना हुआ। एक द्रोणिका विदर्भ से लेकर दक्षिणी अंदरुनी तमिलनाडु तक गुजर रही है। इनके प्रभाव के कारण ही मप्र में अच्छी वर्षा का दौर देखने को मिला। सामान्य: इतने सारे सिस्टम अप्रैल व मई माह में देखने को नहीं मिलते है।

इन महीनों में सामान्य दिनों में जहां उत्तर पश्चिमी हवाएं चलती है और उनमें एक रूपता रहती है। वही इस बार हवाओं का पैटर्न भी बदला हुआ है जिसके कारण मौसम में बदलाव दिखाई दे रहा है।

2-4 दिन और चैन नहीं
मौसम के जानकारों की मानें तो इतना ही काफी नहीं है। अभी 1 व 2 मई को भी ऐसा ही मौसम रहने वाला है। यह अलग बात है कि रविवार के मुकाबले वर्षा की तीव्रता कम रहेगी लेकिन बादल व वर्षा का दौर जारी रहेगा। वही 3 व 4 मई को फिर से शहर में तेज मूसलाधार बारिश होने की संभावना है।

..तो किसान क्या करेंगे?

बेमौसम में वर्षा के चलते रबी का गेहूं,चना तो खराब हुआ। मौसम की ऐसा ही मिजाज रहा तो आगे ज्येष्ठ-वैशाख के खेती किसानी के काम कैसे होंगे? अभी नुकसान कौन सा कम हुआ। जैसे-तैसे अनाज निकाला..सरकारी खरीदी केंद्र पर उसे टिकाते इससे पहले ही बारिश..! पूरा महीना निकल गया..डर-डर के काम करते।

कहते हैं ,ज्येष्ठ -वैशाख,बरसा बदरे तो समझो सावन-भादों में ये रुलाएगा। होगा क्या ऐसा..? मौसम विभाग तो इससे इनकार कर रहा है। उसका मानना है कि इस साल देश में सामान्य मॉनसून रह सकता है। साल भर औसत 96 प्रतिशत बारिश होने का अनुमान है।

बहन,अल नीनो से उम्मीद

साल 2023 के मौसम विभाग का हालांकि यह प्रारंभिक अनुमान है..अगस्त-सितंबर में अल नीनो का असर देखने को मिल सकता है. हालांकि,भारत में मानसून और अल नीनो का सीधा संबंध नहीं है। भारत में आमतौर पर मानसून की शुरुआत 25 मई से 1 जून के बीच होती है।

इस दौरान मानसून केरल में दस्तक देता है। बहरहाल,विभाग किसानों को राहत की बात कर रहा है। उसका कहना है कि सामान्य मानसून की स्थिति में बारिश होने से फसलों को फायदा मिल सकता है।

पूर्वानुमान में यह उम्मीद की जा रही है कि साल 2023 का मानसून नॉर्मल रहेगा।अच्छी बारिश होने की स्थिति में अच्छी पैदावार होने की उम्मीद होती है। इससे किसानों को फायदा होता है।​

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