दरअसल,मौसम के मिजाज में आए इस बदलाव से मौसम विज्ञानी भी हैरान है। वैशाख की तपती दोपहरी की जगह आकाश में मंडराते बादल,तेज हवा के साथ बरसते ओले व तेज बारिश..बेमौसम की इस बरसात को लेकर किसान ज्यादा चिंतित हैं। हो भी क्यों न..? मौसम के बदले मिजाज से शहरियों को भले कोई फर्क न पड़े..लेकिन खेती का पूरा दारोमदार तो मानसून पर ही टिका है।
अब प्रदेश के प्रमुख शहर इंदौर को ही लीजिए..सुबह से उमड़-घुमड़ रहे बदरा दोपहर होते-होते बरसे..और ऐसे बरसे कि बीते 128 साल का रिकॉर्ड तोड़ डाला।मौसम विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार,128 साल बाद वैशाख में इंदौर में ऐसी मूसलाधार बारिश हुई।
भरे वैशाख में गर्मी की जगह सर्दी का अहसास..ऐसा क्या हो गया मौसम को। तो भैया इतना जान लो..इसमें भी पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान का हाथ है।अब वहां लोग महंगाई व दीगर चीजों से परेशान तो आपको कैसे चैन से बैठने दें।
बेमौसम में वर्षा के चलते रबी का गेहूं,चना तो खराब हुआ। मौसम की ऐसा ही मिजाज रहा तो आगे ज्येष्ठ-वैशाख के खेती किसानी के काम कैसे होंगे? अभी नुकसान कौन सा कम हुआ। जैसे-तैसे अनाज निकाला..सरकारी खरीदी केंद्र पर उसे टिकाते इससे पहले ही बारिश..! पूरा महीना निकल गया..डर-डर के काम करते।