
जी हां,इस अद्भुत कृति की रचना की है,सूरत भेस्तान गुजरात के श्रीराम भक्त रामभाई गोकर्णभाई (In photo) ने। उनके द्वारा लिखित यह रामायण 19 किलो वजनी और 530 पन्ने की है। इसमें उन्होंने 222 तोला सोने की स्याही का उपयोग किया।

प्रत्येक रामनवमी यानी भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव पर इस अदभुत कृति की पूजा की जाती है। भक्त इसके दर्शन साल में सिर्फ तीन बार गुरुपूर्णिमा, रामनवमी और दीपावली के दूसरे दिन एकम तिथि यानी गोवर्धन व अन्नकूट पूजन पर्व के दौरान ही कर सकते हैं।