
धर्म शास्त्रों के अनुसार हमेशा दक्षिण दिशा में खड़े होकर ही शिवलिंग पर जल चढ़ाना चाहिए। इस दिशा में खड़े होकर भगवान शिव को जल चढ़ाने से पुण्य की प्राप्ति होती है। शिवलिंग पर दक्षिण दिशा में खड़े होकर जल चढ़ाते समय यह ध्यान रखें कि जल उत्तर दिशा की ओर से शिवलिंग पर गिरे, इससे भगवान भोलेनाथ जल्द प्रसन्न होते हैं।
भगवान शिव के जल चढ़ाने के बारे में शिव पुराण में वर्णन आता हैं की देवाधिदेव शिवजी को जलधारा अत्यंत प्रिय है । शिवजी को नित्य प्रात काल ब्रह्म मुहूर्त में जल चढाना चाहिए | इसलिए जल चढ़ाते समय ध्यान रखें कि भगवान शिव को धीरे.धीरे धारा के रूप में मंत्र उच्चारण के साथ जल अर्पित करें । श्रद्धा एवं विश्वास के साथ जो भी मंत्र आता हैं उसका मनन करते हुए जल धारा शिवलिंग पर चढाने से भगवान शिव की कृपा सदैव बनी रहती हैं | जीवन की राह आसन होती हैं | अकाल मृत्यु का भय नहीं होता है । भगवान शिव भक्तों को अत्यंत प्रिय हैं |
सनातन धर्म में सभी भक्तजन अपनी अपनी श्रद्धा के अनुसार शिव पूजन करते हैं परन्तु सही विधि का ज्ञान नहीं होने के कारण शीघ्र फल प्राप्त नहीं होता | भगवान शिव का दूसरा नाम भोलेनाथ भी हैं। ये तो केवल भाव व श्रद्धा से की गई पूजा से प्रसन्न हो जाते है |शिवलिंग पर जल क्यों चढ़ाया जाता हैं इस का वृत्तांत समुद्र मंथन से जुड़ा हैं |